अपराधिक मामलों वाले सांसदों पर ध्यान दें, 25 साल की युवती पर नहीं: CJP ने जीरो FIR की आलोचना की
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर नोएडा की एक महिला के खिलाफ दर्ज मामले को "अस्वीकार्य" बताते हुए CJP (सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस) के नेता सौरव दास ने अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आपराधिक न्याय प्रणाली का इस्तेमाल न करें। उन्होंने कहा कि जो लोग आपत्तिजनक टिप्पणियों से व्यथित हैं, उन्हें आपराधिक मामले के बजाय मानहानि का रास्ता अपनाना चाहिए।
सौरव दास ने कहा कि आपत्तिजनक टिप्पणियों का समर्थन या बचाव नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन आपराधिक कार्रवाई करने से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Free Speech) पर नकारात्मक और डराने वाला असर पड़ता है।
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- स्वतंत्र अभिव्यक्ति पर असर: सौरव दास का कहना है कि इस तरह की आपराधिक कार्रवाई से अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
- विरोध का सही तरीका: CJP नेता ने प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि वे विरोध जताते समय अपनी शब्दावली का चुनाव सावधानीपूर्वक करें।
- जीरो FIR पर विवाद: प्रदर्शन के दौरान पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करने के आरोप में नोएडा की एक महिला के खिलाफ दर्ज जीरो FIR पर यह प्रतिक्रिया सामने आई है।